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सिंघु बॉर्डर पर डटे किसानों की आंखों में कौंधता सवाल- इतनी हड़बड़ी क्यों, कहने-सुनने का वक्त क्यों नहीं दिया?

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मृणाल पाण्डे का लेख: जमीनी बदलाव के लिए नया साल मांग रहा है नया सोच, क्या खुद को बदलेंगे सरकार?

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खरी-खरी: आशा, निराशा और संघर्षों वाला होगा नववर्ष

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इस साल सिनेमा से सड़क तक सुनाई दी विरोध की गूंज, कई मुद्दों पर सत्ता से दो-दो हाथ करने के लिए बॉलीवुड था मुखर!

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अभी अपने यहां कई बातें हिटलर शासन से मिलती-जुलती हैं, यकीन नहीं हो तो इन बातों पर जरा गौर कीजिए

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संस्थानों की गिरावट ऐसी विडंबना बन गई है जो असहनीय और विनाशकारी हो सकती है

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कोरोना महामारी ने जीवन-समाज सबकुछ बदल डाला, इस साल से चीजों के आकार लेने की संभावना

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गांधी की रीति पर चलते दिख रहे आंदोलनरत किसान, सत्ता पक्ष किस रीति पर चल रहा ये कहना मुश्किल

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आकार पटेल का लेख: आमदनी दोगुनी करने के पीएम मोदी के जुमले पर आखिर क्यों विश्वास नहीं कर सकते किसान!

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मृणाल पांडे का लेख: साइबर स्पेस में किसान बनाम कॉरपोरेट युद्ध और सकपकाती बाजार की ताकतें

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सरकार ने कृषि कानून बनाकर मौत की सजा सुना दी, अब विचार करने को कह रही कि फांसी दें या गोली मारें

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